निबंध: होली पर निबंध | Holi Essay in Hindi

essay on holi in hindi

होली रंगो का त्यौहार है | कई बार बच्चों को होली के विषय पर निबंध लिखना होता है | इस आर्टिकल में आपको मिलेगा Essay on Holi in Hindi  / होली पर निबंध 500 तथा 800 शब्दों में | 

निबंध 1 : (300 शब्द)

होली रंगों का त्यौहार होता है | यह प्रायः प्रत्येक वर्ष मार्च के महीने में मनाया जाता है | होली त्यौहार के नामांकरण और इसे मानाने के पीछे विशेष कारण है |

पूर्व काल में हिरण्यकश्यप नाम का अधर्मी राजा था | उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान् विष्णु का परम भक्त था | हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु को अपना शत्रु मानता था तथा प्रह्लाद को उनकी भक्ति करने के लिए मृत्यु दंड देना चाहता था | इसके लिए उसने अपनी बहन होलिका की को चुना | होलिका के पास दिव्या वस्त्र था जिससे वह अग्नि में जलने से बच जाती थी | वह उसे ओढ़कर प्रह्लाद को लेकर अग्नि में बैठ जाती है | भगवान् विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच जाता है और होलिका भस्म हो जाती है | तभी से यह त्यौहार प्रत्येक वर्ष अधर्म पर धर्म के विजय के प्रतिक के रूप में मनाया जाता है | 

इस दिन पूरा देश रंगों से सराबोर हो जाता है| लोग एक दूसरे को रंग लगा कर खुशियां मानते हैं | बच्चे भी पिचकारी से रंग एक दूसरे को रंग लगाते हैं | होली के गीतों से पूरा माहौल रंगारंग हो जाता है | सड़कों पर युवाओं की टोली को नाचते गाते देखा जा सकता है | 

होली के दिन कई जगहों पर कुछ लोगों को अनैतिक कार्य करते भी देखा जाता है | जैसे की शराब के नशे में हुड़दंग करना | अनैच्छिक व्यक्तिओं पर जबरदस्ती रंग लगाना इत्यादि | हमे ऐसी किसी भी कृत्य से बचना चाहिए जिससे इस त्यौहार की गरिमा में कमी आये | 

होली के दिन लोग पुराने सारे गीले शिकवे भूल कर एक दूसरे से गले मिलकर सारा बैर समाप्त कर लेते हैं | होली का त्यौहार हमे बुराई पर अच्छे की जीत की प्रेरणा देता है | यह त्यौहार हमे एक दूसरे से मिलजुलकर रहने का सन्देश देता है | 

निबंध 1 : (500 शब्द)

होली हिन्दुओं का सबसे प्रमुख त्यौहार में से एक है | यह प्रत्येक वर्ष फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है | होली रंगो का त्यौहार है | पूरा देश इस दिन  सराबोर हो जाता है | यह भारतवर्ष के अलावा पडोशी देश नेपाल में भी मनाया जाता है | कई जगहों पर होली न सिर्फ हिन्दू धर्म के बल्कि अन्य धर्मो के लोग भी भाईचारे के साथ मनाया जाता है | इस दिन लोग एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाकर सारे गीले शिकवे भूल कर गले मिलते हैं | 

होली मानाने के पीछे मान्यताएं 

हिरण्यकश्यप नाम का राजा अपने पुत्र प्रह्लाद से नफरत करता था, क्योंकि प्रह्लाद विष्णु भक्त थे और हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु को अपना शत्रु मानता था | हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मृत्युदंड देने की योजना बनायीं | उसने अपनी बहन होलिका का आह्वान किया | होलिका के पास ऐसा एक वस्त्र था जिसे ओढ़ने पर वह अग्नि में जलने से सुरक्षित हो जाती थी | हिरण्यकश्यप ने होलिका को आदेश दिया की वह प्रह्लाद को लेकर जलती अग्नि की चिता पर बैठ जाये | होलिका ने ऐसा ही किया | वह प्रह्लाद को लेकर जलती चिता में बैठ गयी | उसी समय भगवन विष्णु की अनुकम्पा के कारण तेज़ वायु का वेग आया और वह वस्त्र होलिका के शरीर से उड़कर प्रह्लाद के शरीर में आ गया | इस प्रकार होलिका अग्नि में भस्म हो गयी और प्रह्लाद बच गया |

उसी दिन से आज तक प्रत्येक वर्ष होलिका दहन का आयोजन किया जाता है और उसके दूसरे दिन रंगो वाली होली मनाई जाती है | 

होली के दिन की परंपरा 

होली के दिन घर-घर में स्वादिष्ट पकवान बनाये जाते हैं | लोग एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर होली की शुभकामनायें देते हैं | जगह -जगह होली के गीतों की गूँज भी सुनाई देती है | बच्चे इस त्यौहार को लेकर विशेष रप से उत्साहित होते हैं | वे पिचकारियों से एक दूसरे पर रंग डालकर मस्ती करते हैं | शाम को अबीर (सूखे रंग) से एक दूसरे को तिलक लगायी जाती है | हर तरफ माहौल  रंगबिरंगा हो जाता है | लोग रंगों की होली के बाद शाम को अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के यहाँ जा कर अबीर लगाकर एक दूसरे को होली की शुभकामनायें देते हैं | 

उपसंहार 

होली का दिन हमारे लिए खुशियां लेकर आता है | सारा देश होली के रंगों से सराबोर होकर रंगीन हो जाता है | होली का त्यौहार हमे सारे गीले शिकवे व आपसी बैर भूलकर एक दूसरे के साथ मिलकर मानना चाहिए | यह सन्देश यह त्यौहार हमे देता है तथा तभी इस त्यौहार को मानाने का उद्देश्य सार्थक भी होगा | 

 

 

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